Sunday, 9 September 2018

आरक्षण: हम क्या करें?

आज समय जाति और धर्म के आधार पर बंटने का नहीं है!
कोई भी आन्दोलन इनके नाम पर उठता है तो हमारा विभाजन होता है और हम कमजोड पड़ते हैं. खास कर जब फासीवाद, यानि भाजपा और आरएसएस की सरकार और संगठन की चौतरफा मार हमपर पड़ रहा है.
रोजगार घट रहा है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा महंगा होता जा रहा है. जिंदगी के साधन कठिन थे और ज्यादा कठीन हो रहे हैं! एक ही चीज बढ़ता हुआ दिख रहा है, "जीडीपी" और बड़े पूंजीपतियों, अम्बानी और अदानी के बढ़ते मुनाफे और संपत्ति!
हम क्या करें? रोजगार है नहीं और जो भी थोडा सा है, उसी के लिए लड़ें और मरें? या फिर एक हो कर 100% रोजगार, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए लड़ें?
कई को याद होगा 1980 तक डॉक्टर के प्राइवेट प्रक्टिस नहीं होते थे पर अब सर्दी खांसी के इलाज के लिए भी 500 रुपये लग जाते हैं, जबकि हमारी क्रय शक्ति विलुप्त होती जा रही है! शिक्षा का व्यापारीकरण हो रहा है और सामान्य इंसान के बस से बाहर हो रहा है!
दोस्तों, आरक्षण के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होने का मतलब है अपनी ताकत ख़त्म करना! और सोचो, कुछ पार्टी के एकमात्र एजेंडा आरक्षण ही है!!
उठ खड़े हों! हम अभी भी ताकतवर हैं और हमारी एकता जाति और धर्म पर नहीं टूटनी चाहिए!

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