Viral On Bharat: आरएसएस ने खुद खोली मोदी की पोल खत्म हो गयी सारी मो...: आरएसएस ने भाजपा को उनके लिए गये गलत फैसलों और कार्यशैली को देखते हुए पार्टी की जो लोकप्रियता घट रही है उसे लेकर सचेत किया है| ...
बहुत खुश ना हों साथियों! फासीवाद के खिलाफ संघर्ष को और तीव्र करें!
फासीवाद की अम्मा पूंजीवाद को हराकर ही दम लें साथियों, घायल सांप और भी खतरनाक हो जाता है, इसको पूरी तरह दफनाना ही होगा!
समाजवादी क्रांति जिंदाबाद!
Saturday, 17 March 2018
Friday, 16 March 2018
Jan Gan Man Ki Baat, Episode 211: TDP Pulls out of NDA and Kejriwal's Ap...
भाजपा (और आरएसएस) बड़े पूंजीपतियों और वित्तीय संस्थानों के, विदेशी कुलीन कंपनी के इमानदार और निष्ठावान पार्टी है. आखिर क्यूँ ना हो? खरबों पैसे लगाये हैं उनलोगों ने कौंग्रेस (जब की जनता उसे हटाने के लिए सड़क पर आ चुकी थी) के जगह पर इस फासीवादियों, देश द्रोहियों को सत्ता में लाने के लिए!
सही सोचा आपने, पूंजीवाद के चाटुकार मजदूर वर्ग और किसान के विरोधी होंगे, इनके शोषण को बढ़ाएंगे, और प्रतिरोध होने पर उन्हें प्रताड़ित करेंगे, हर संभव प्रयास कर विरोध को दबायेंगे. धर्म, जाती, देश्वाद, व्यक्तिवाद, झूठ, पुलिस, प्रशाशन, दंगा, आदि का सहारा लेकर जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश होगी और हो रहा है!
क्या भाजपा और इनके मौकापरस्त मित्र दल को हटाकर हम जनवाद बहाल कर सकते हैं? वापस कौंग्रेस और उसके सहयोगियों के पास आ जाएँ? ध्यान रहे इसमें से आधे से अधिक दल और राजनीतिग्य दोनों के साथ रह चुके हैं और रहेंगे!
समय है, हम गहरी निद्रा से जागें, पूंजीवाद के असली चहरे को पहचाने और समाजवाद के लिए सर्वहारा क्रांति के लिए एकजुट हों, संघर्ष करें और पूंजीवाद को दफ़न करें!
Friday, 2 March 2018
त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड के चुनाव का नतीजा!
आँखे खोलो दोस्तों! "ठोस परिस्थिति का ठोस विश्लेषण" इन्ही परिस्थियों के लिये लिखा गया है!
0 से यदि 30 के आस पास भी फासीवादी पार्टी (सीपीएम के बराबर) आ रही है, तो कुछ भयानक गड़बड़ी है, पर यहाँ तो भाजपा पूर्ण बहुमत से आ रहा है! बाकि दोनों राज्यों, मेघालय और नागालैंड, में भी वह बड़ा होकर आ रहा है!
बंगाल गया, त्रिपुरा गया! 3 दशक के शाषन के बाद यह हालत! क्या हमारे समर्थक केवल समर्थक या वोट बैंक बन कर ही रह गए? कोई शिक्षा, ट्रेनिंग, आदि नहीं? वर्गीय समझ, वर्गीय एकता, वर्गीय संघर्ष क्या चुनाव से चुनाव तक ही सीमित रहा?
यह दुर्भाग्य नहीं है, ना ही मजदूर वर्ग की "मौका परस्ती", बल्कि कम्युनिस्टों की गलत नीति, मजदूर, किसान विरोधी नीति का परिणाम है!
उम्मीद है, अभी तो अत्म्लोचना करेंगे और वर्गीय एकता के आधार पर वर्गीय संघर्ष का झंडा बुलंद करेंगे! चुनाव महज एक रास्ता है, वर्गीय सत्ता हासिल कर वर्गीय तानाशाही कायम करने के लिए, ताकि पूंजीवाद वापसी ना कर सके और समाजवाद की स्थापना हो सके!
0 से यदि 30 के आस पास भी फासीवादी पार्टी (सीपीएम के बराबर) आ रही है, तो कुछ भयानक गड़बड़ी है, पर यहाँ तो भाजपा पूर्ण बहुमत से आ रहा है! बाकि दोनों राज्यों, मेघालय और नागालैंड, में भी वह बड़ा होकर आ रहा है!
बंगाल गया, त्रिपुरा गया! 3 दशक के शाषन के बाद यह हालत! क्या हमारे समर्थक केवल समर्थक या वोट बैंक बन कर ही रह गए? कोई शिक्षा, ट्रेनिंग, आदि नहीं? वर्गीय समझ, वर्गीय एकता, वर्गीय संघर्ष क्या चुनाव से चुनाव तक ही सीमित रहा?
यह दुर्भाग्य नहीं है, ना ही मजदूर वर्ग की "मौका परस्ती", बल्कि कम्युनिस्टों की गलत नीति, मजदूर, किसान विरोधी नीति का परिणाम है!
उम्मीद है, अभी तो अत्म्लोचना करेंगे और वर्गीय एकता के आधार पर वर्गीय संघर्ष का झंडा बुलंद करेंगे! चुनाव महज एक रास्ता है, वर्गीय सत्ता हासिल कर वर्गीय तानाशाही कायम करने के लिए, ताकि पूंजीवाद वापसी ना कर सके और समाजवाद की स्थापना हो सके!
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