28 अक्तूबर को ब्राजील में हुए चुनाव में अमेरिकी परस्त, दक्षिणपंथी पार्टी बहुमत से सत्ता में आ गयी है. सोशल लिबरल पार्टी के नेता जैर बोलसोनारो राष्ट्रपति बनेंगे. एक बात बताना चाहूँगा कि इस "अपराधी" के बोलने का तरीका, हाव भाव वैसे ही है, जैसे की सब फासीवादी नेताओं के होते हैं, जैसे हिटलर, ट्रंप, मोदी, आदि! झूठ, बेतहाशा वादा, जिसके बारे में उसे भी पता है कि पूरा नहीं किया जायेगा, धर्म और जाति का इस्तेमाल, देशवाद और व्यक्तिवाद का इस्तेमाल, बड़े पूंजीपतियों द्वारा अरबों खरबों का इनमें "निवेश", मिडिया और सोशल मिडिया का बखूबी इस्तेमाल, विपक्ष का कानूनन और गैर कानूनन खात्मा, विदेशी पूंजी का साथ, आदि का इस्तेमाल फासीवाद का लक्षण है!
तो ब्राज़ील में भी एक फ़ासिस्ट केंद्रीय सत्ता की कुर्सी पर बैठ गया है। जाहिर है, कम्युनिस्टों पर हमले होंगे। यह चिंताजनक बात है कि संशोधनवाद हर जगह फासीवाद के लिए जमीन तैयार करता जा रहा है।
इस पर भारतीय "वाम" द्वारा सतही टिप्पणी! देखें:
" आपने अगर भारत में केंद्र सत्ता पर एक फासिस्ट बिठा दिया है तो ब्राज़ील में ऐतराज़ क्यों ? ब्राजील अगर कम्युनिस्ट होते तो आज तक जनवादी इनकलाब पूरा हो जाता |"
जरा दूसरी पंक्ति फिर से पढ़ें!
भारत में हमने फासिस्टों को नहीं बिठाया है! जिस 31% मतदातों (कुल हुए मत का) ने भाजपा को वोट दिया, उनमे से अधिकांश ने तत्कालीन आर्थिक, राजनितिक, सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ, कोई विकल्प ना होने के कारण, वोट दिया! और विकल्प वामपंथ हो सकता था और होगा भी, पर अंतिम पंक्ति को फिर से पढ़ें, "संशोधनवाद फासीवाद के लिए जमीन तैयार करता है"!
और मिहनतकाश आवाम, स्वाभाविक रूप से वाम के तरफ आकर्षित होता है, पर संशोधनवाद यानि सर्वहारा वर्ग से गद्दारी के कारन यह विश्वाश टूट जाता है, और दशकों तक बिचारा दुशमनों के जाल में ही उलझा रहता है!
जहाँ तक दक्षिणपंथ का सवाल है, बेहिसाब वादे, धर्म, जाति, देश्वाद, व्यक्तिवाद, गैर क़ानूनी तरीके का इस्तेमाल करता है और जाल में तड़प रहे मजदूर वर्ग धोखा पर धोखा खाता रहता है! जनता या मजदूर, किसान को कोसना सामाजिक क्रांति के नियमों से दूर हटना है!
जहाँ तक ब्राज़ील या अन्य देशों का सवाल है जहाँ मजदूर वर्ग विरोधी पार्टी या फिर अमेरिकी चाटुकारों के सत्ता में आने का सवाल है, इतना कहना पर्याप्त है कि मजदूर वर्ग की पार्टी चरित्र अन्तराष्ट्रीय है और हमारा उनेक बारे में जानना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि हमें अर्ताराष्ट्रीय टप्रवित्ति का पता चले और देशवाद की मूढ़ता से बाहर निकलें! अन्तराष्ट्रीय समर्थन सर्वहारा चरित्र, संस्कृति, एकजुटता और समाजवादी क्रांति का हिस्सा है!
सही क्रन्तिकारी पार्टी, क्रन्तिकारी विचारधारा सहित ही एक जन आन्दोलन को सही नेत्रित्व दे सकता है और इन फासीफादियों का आधार, यानि पूंजीवाद को दफ़न कर सकता है और एक समाजवादी समाज की संचरण कर सकता है!