Thursday, 18 May 2017

फासीवाद भारत में: मुकाबला उदारपंथ से?

उदारपंथी आवश्यक रूप से पूंजीवाद के ही समर्थक होते हैं. पूंजीवाद के किसी भी रूप का समर्थन करने से पीछे नहीं हटते, चाहे फासीवाद ही क्यूँ ना हो!
इटली और जर्मनी में फासीवाद के उभार में इनका भी हाथ है. सामाजिक लोकतंत्र (Social Democracy), जो पूंजीवाद का ही रूप है, के पक्षधर भी अपने फासीवादी सरकार के साथ आ गए, देश के नाम पर, और युद्ध का भी समर्थन करने लगे!
अमेरिकी बर्नी सैंडर्स भी इस वीभत्स कुकृत्य का साथी है जो अमेरिकी शस्त्र को इजरायल बेचने और सीरिया पर आक्रमण का समर्थन करता है! जेरेमी कौर्बिन इंग्लैड में इसका प्रतिबिम्ब है!
फासीवादी सरकार ने अपने पिछले सरकार की पूंजीवादी शोषण के मशीन को जारी ही नहीं रखा है बल्कि उसे त्वरित भी किया है, अमेरिकी निवेश पूंजी के हित में अपने देश को गिरवी किया है और जनता के एकता और संघर्ष को तोड़ने के लिए हर घृणित से घृणित कार्य किये हैं और करेगा!
सर्वहारा क्रांति के आलावा और कोई रास्ता बचा है क्या?


"जिस कल्लूरी ने बस्तर में पत्रकारों को झूठे केसों फंसाया, जिस कल्लूरी ने बाहर से रिपोर्टिंग करने आए पत्रकारों को यह धमकी देकर बस्तर के बाहर रोक दिया, कि यदि आदिवासियों के पक्ष में रिपोर्टिंग करोगे तो ज़िन्दा नहीं बचोगे, जिस कल्लूरी ने राजकीय आतंक का ऐसा राज कायम किया कि भयंकर और विभीत्स मानवाधिकारों का उल्लंघन की रिपोर्टिंग पर भी निषेध हो गया, उसी कल्लूरी को पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIMC ने अपने यहां व्याख्यान देने बुलाया है।
यही तो होता है फ़ासीवाद। फ़ासीवाद सिर्फ शासक फासीवादी पार्टी के गुंडों की फौज द्वारा देश भर में मचाए जाने वाले उत्पात नहीं होते, या फिर सिर्फ पुलिस फौज द्वारा आम मेहनतकश जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन भर नहीं होता । फ़ासीवाद होता है IIMC जैसे पत्रकारिता के संस्थानों में कल्लूरी जैसे जल्लादों का व्याख्यान । फ़ासीवाद होता है अर्नब, तिहाड़ी जैसी सुपारी पत्रकारिता, फ़ासीवाद होता है अप्पा राव और जगदेश कुमार जैसा वीसी , फ़ासीवाद होता है इतिहास भूगोल, विज्ञान के पाठ्यक्रमों में किए जाने वाले धुर दक्षिणपंथी विकृतीकरण । गैस चैंबर, यातना शिविर और होलोकॉस्ट तो फ़ासीवाद के आखरी चरण की चीजें हैं, और हो सकता है भारतीय फ़ासीवाद उस हद तक ना भी जाए । लेकिन उसके इंतज़ार में फ़ासीवाद को नकारने की भूल करना बहुत खतरनाक है, क्योंकि फ़ासीवाद होता है कल्लूरी का IIMC में बिना किसी प्रतिरोध और विरोध का सामना किए अपना व्याख्यान दे आना।"

~ शिखा अपराजिता

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