बंगाल के 7 नगर निगमों के लिए हुए चुनाव के नतीजे बुधवार को आ गए हैं। इस चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की है। भाजपा की हार हुयी है.
भाजपा की आर्थिक निति वही है जो कौंग्रेस या त्रिनामुल कौंग्रेस की है! “धार्मिक”‘चेहरा केवल मजदुर वर्ग की एकता तोड़ने और उनका शोषण तीव्र करने के लिए है! यानि, पूंजीवादी उत्पादन सम्बन्ध को बनाये रखना. निजी पूंजी के श्रमिक के ऊपर अधिनाकत्व कायम बरक़रार रखना.
पूंजीवादी उत्पादन गतिशील है, वैसे ही जैसे दुनिया की बाकि प्राकृतिक या मानवीय घटनाएँ, सम्बन्ध, इत्यादि! भारत स्वतंत्रता के बाद पूंजीवादी रास्ते पर चला नेहरु, पटेल के नेत्रित्व वाली कौंग्रेस की अगुवाई में. 1990 के बाद वही पूंजीवाद सुधार के नाम पर विश्व पूंजी से ज्यादा जुड़ने लगा, मजदुर वर्ग और किसानों का शोषण गुणात्मक बढ़ा. अब वह भयावह हो चूका है. प्रतिरोध भी बढ़ रहा है, जिसे दबाने के लिए धर्म, गाय, मंदिर, देश, व्यक्तिवाद, आदि का सहारा लिया जा रहा है!
आज के फासीवाद का आधार कौंग्रेस और बाकि बुर्जुआ दलों ने ही तैयार किया है, भले ही वह पीडीपी हो या शिव सेना, डीएमके, त्रिनामुल कौन्न्ग्रेस , जेडीयू, राजद हो! 1977 और 2012 के आन्दोलन ने भी फासीवाद का ही आधार मजबूत किया. जनता दल या आप ने मजदुर वर्ग के शाशन के लिए कुछ भी नहीं किया!
खुश होने की जरुरत नहीं है, आज ना तो कल, खुलेआम फासीवादी शाशन पुरे भारत को निगलने वाला है और उसका प्रतिरोध क्षेत्रीय बुर्जुआ दल या फिर संशोशंवादी, मौका परस्त, सुविधाभोगी वामपंथी दल भी करने में असमर्थ हैं!
जरुरत है एक नए शुरुआत की! एक सर्वहारा वर्ग के दल की, जो समाजवादी क्रांति की तयारी करे, फासीवाद को नष्ट करे, समाजवादी क्रांति करे. जिन पूंजीवादी दलों ने फासीवाद का आधार तैयार किया है, वह भला फासीवाद का क्या मुकाबला करेंगे? फर्जी राष्ट्रवादियों, वामपंथियों से सावधान! द्वंदात्मक रूप से वह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं! भगत सिंह और उनकी पार्टी HSRA कितना सामायिक हो रहा है और जरुरत है मजदूरों और किसानों के लये!
वर्गीय चेतना, वर्गीय एकता, वर्ग संघर्ष ही रास्ता है सर्वहारा वर्ग के शाशन की, जो एक वर्ग विहीन समाज बना सकता है और बनाएगा!!
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