भक्तों के खिलाफ सोशाल मिडिया पर काफी आक्रमण हो रहे हैं, उनके दिमाग और सोच की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है!
पर क्या इस बात से "भक्त" सुधर जायेंगे? हम जानते हैं, नहीं! क्यूँ? क्यूंकि इस भक्ति का आधार एक सामाजिक आन्दोलन है. जी हाँ. एक प्रतिगामी, जनता विरोधी, सामाजिक आन्दोलन!
भक्त तो खुश हैं की वह हिन्दू राष्ट्र के लिए सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार है. वैसे उनके बीच एक बड़ा तबका ऐसा है जो पैसे पर यह काम कर रहा है!
इतिहास से सीखें. हिटलर भी तो एक आन्दोलन के तहत ही आगे बढ़ा और करोड़ों इंसानों को मरवा दिया! अयोतोल्लाह खुमैनी, ईरान में, अमेरिकी पिट्ठू राजा शाह को इसी तरह के जन आन्दोलन द्वारा हराकर एक भयंकर मजदूर विरोधी, महिला विरोधी, जनता विरोधी मुल्ला-पूंजीपतियों-अपराधियों की सत्ता लाया!
भारत और विश्व के कई देशों में भी यह दिख रहा है. उक्रेन, पोलैंड, अमेरिका, आदि में इस तरह के आन्दोलन खड़ा हो रहे हैं, यदि कोई स्वयम स्फूर्त आन्दोलन खड़ा होता है (बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार के खिलाफ) तो अरबों खरबों पैसे लगाकर, मिडिया द्वारा दुष्प्रचार कर, दक्षिण पंथी पार्टी के मदद से बड़े पूंजीपति वर्ग उसे हड़प लेता है. अरब देशों में तथाकित "जासमिन क्रांति" का यही ह्रश्व हुआ!
हमारे यहाँ के 2012 के आन्दोलन का ही यह असर है की हम फासीवाद को झेल रहे हैं! और जबतक इस बात को हम नहीं समझेंगे, तबतक इस फासीवाद, का सामना सही ढंग से नहीं कर पाएंगे, बल्कि उसका अनचाहे समर्थन ही करेंगे!
फासीवाद क्या है? पूंजीवाद का ही एक अति विकृत रूप, सड़ांध और खुनी रूप. यहाँ पूंजीपति वर्ग अति मुनाफा कमाने की लालसा (और अपनी अन्दुरुनी विरोध के कारन, गिरते मुनाफा और बढ़ते मिहनतकाश आवाम का विरोध, जिसका हल उसके पास नहीं है) में बुर्जुआ प्रजातंत्र को भी ध्वस्त कर देता है और खुलेयाम संविधान और प्रजातंत्र के "खम्भों" की अवहेलना करता है और पुलिस, प्रशाषण, न्यायलय और इन "अंधे गुंडों या भक्तों" या भाड़े के गुंडों द्वारा जनता के विरोध को मसल देता है!
तो हम क्या करें? साथियों, यदि आप यहाँ तक पढ़ चुके हैं तो यह स्पष्ट है की हमारा विरोध केवल इन "भक्तों" के खिलाफ ही नहीं, फासीवाद के खिलाफ ही नहीं बल्कि इनकी जननी पूंजीवाद के खिलाफ होना चाहिए! एक क्रन्तिकारी विचाधारा और क्रन्तिकारी पार्टी ही फासीवादी सामाजिक आन्दोलन का सफलतापूर्वक विरोध कर सकता है और उसे नेस्तनाबूद कर सकता है. पूंजीवाद के जगह समाजवाद की स्थापना कर सकता है और हर अन्याय, हर शोषण और हर प्रतारण को हमेशा के लिए ख़त्म कर सकता है!
तो साथियों अपने कुपमंडूकता से निकलें, क्रांति का रास्ता अख्तियार करें, मजदूर वर्ग और किसान के साथ एकताबढ हों, क्यूंकि वही क्रांति के वाहन होंगे और समाजवाद के निर्माण के आधार होंगे, क्यूंकि इस क्रांति की जरुरत उन्हें ही है!!
इंकलाब जिंदाबाद! मजदूर एकता जिंदाबाद!
No comments:
Post a Comment