"आप किसी प्रचलित विश्वास का विरोध करके देखिये, किसी ऐसे नायक या महान व्यक्ति की आलोचना करके देखिये, जिसके बारे में लोग यह मानते हैं कि वह कभी कोई गलती कर ही नहीं सकता इसलिये उसकी आलोचना की ही नहीं जा सकती, आप के तर्कों की ताकत लोगों को मजबूर करेगी कि वे अहंकारी कहकर आपका मजाक उड़ायें। इसका कारण मानसिक जड़ता है।
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आलोचना और स्वतंत्रत चिन्तन क्रान्तिकारी के दो अनिवार्य गुण होते हैं। यह नहीं कि महात्माजी महान हैं।
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इसलिये किसी को उनकी आलोचना नहीं करना चाहिए; चूँकि वे पहुँचे हुए... आदमी हैं इसलिए राजनीति, धर्म अर्थशास्त्र या नीतिशास्त्र पर वे जो कुछ भी कह देंगे वह सही ही होगा; आप सहमत हों या न हों पर आप को कहना जरूर पड़ेगा कि यही सत्य है। यह मानसिक प्रगति की ओर नहीं ले जती। साफ जाहिर है कि यह प्रतिक्रियावादी मानसिकता है।"
-भगत सिंह
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आलोचना और स्वतंत्रत चिन्तन क्रान्तिकारी के दो अनिवार्य गुण होते हैं। यह नहीं कि महात्माजी महान हैं।
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इसलिये किसी को उनकी आलोचना नहीं करना चाहिए; चूँकि वे पहुँचे हुए... आदमी हैं इसलिए राजनीति, धर्म अर्थशास्त्र या नीतिशास्त्र पर वे जो कुछ भी कह देंगे वह सही ही होगा; आप सहमत हों या न हों पर आप को कहना जरूर पड़ेगा कि यही सत्य है। यह मानसिक प्रगति की ओर नहीं ले जती। साफ जाहिर है कि यह प्रतिक्रियावादी मानसिकता है।"
-भगत सिंह
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